परमाणु बम का आविष्कार किसने किया और कब? जाने

परमाणु बम का आविष्कार किसने किया और कब?

दोस्तो आज हम देखते है कि जब भी कभी किसी देश के साथ किसी देश के सामरिक रिश्ते बिगड़ते है तो सबसे पहले वे एक दूसरे को परमाणु हमले की धमकी जरूर देते है ।

आज जब पृथ्वी से ऊर्जा प्राप्ति के साधन कम होते जा रहे है और पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच गए है , तब वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा से अपनी जरूरतों को पूरा करने के बारे में प्रमुखता से सोचते है ।

हम सब जानते ही कि सूरज की रोशनी हमारे लिए कितनी फायदेमंद है ? हम सब जानते है की अगर सूर्य की रोशनी का आधा भाग भी हम काम लेते है तो इस पृथ्वी की सम्पूर्ण ऊर्जा जरुरतो को पूरा कर सकते है ।

सूर्य पर जो ऊर्जा उतपन्न होती है वह भी परमाणु  ऊर्जा ही है ।

हम सबने नागासाकी और हिरोशिमा का नाम तो अवश्य ही सुना होगा । अब ये भी जानते है कि आपने हिरोशिमा और नागाशाकी का नाम क्यो सुना है ? अगर मैं गलत नहो हूँ तो आपने इसलन शहरों का नाम सिर्फ परमाणु हमले के लिए सुना होगा क्योकि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अमेरिका ने जापान के इन दो शहरों पर परमाणु हमला करके इन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया था ।

जब हम सब परमाणु ऊर्जा और परमाणु बम के बारे में जानते है तब यह प्रश्न अवश्य ही उठता है कि इतने शक्तिशाली , विनाशक परमाणु बम का आविष्कार किसने किया ? परमाणु बन के आविष्कार की विकास यात्रा क्या ?

आज के इस लेख में हम परमाणु बम से जुड़ी हर छोटी से छोटी और बड़ी बड़ी से जानकारी से आपको अवगत करवाने का प्रयास करते हुए आपके मन के हर एक प्रश्न जो परमाणु के निर्मांण से जुड़ा है का जवाब देने की कोशिश करेंगे तो इस लेख को शुरू से लेकर लास्ट तक पूरा अवश्य पढ़ें ।

परमाणु बम का आविष्कार किसने किया और कब
परमाणु बम का आविष्कार किसने किया और कब

परमाणु बम की विकास यात्रा –

परमाणु बम की विकास यात्रा प्रारंभ होती है फर्मी के परमाणु भट्टी की खोज से । पहली बार वैज्ञानिको ने ऊर्जा के एक ऐसे स्रोत का पता लगाया था जिससे कम पदार्थ से बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता था ।

3 जुलाई 1942 को शिकागो विश्विद्यालय के स्टेडियम के नीचे बने वीरान स्वैस कोर्ट में पहली बार एनरिको फर्मी ने नाभिकिय ऊर्जा का नियंत्रित रूप से विघटन की प्रकिया को करने में सफलता हासिल कर ली थी । अब सिर्फ परमाणु बम बनाकर उसका प्रशिक्षण करना बाकी था । 1945 में परमाणु परीक्षण करने का अवसर अमेरिका को बहुत ही सहजता से मिल गया जब द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ हुआ ।

सन 1939 के द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हो चुकी थी  । अंतरराष्ट्रीय परिस्थियां बदल चुकी थी । जर्मनी में हिटलर की तानाशाही बढ़ती जा रही थी । जर्मनी के लोगो ने हिटलर की तानाशाही से बचने के लिए अमेरिका में शरण लेना उचित समझा । इन शरण लेने वालों में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी थे । पूरी दुनिया को शक होने लगा कि जर्मनी परमाणु हथियार बना रहा है और इस शक के कारण अमेरिका में एक ऐसा वातावरण बनने लगा की अमेरिका को जर्मनी की सफलता से पहले परमाणु परीक्षण करके दुनिया के सामने महाशक्ति बनना चाहिए ।

उसी समय जर्मनी जापान के साथ मिलकर  अमेरिका पंर बमबारी करने लगे  । अमेरिका के कई महत्वपूर्ण और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बंदरगाह जापान की बमबारी में नष्ट हो गए ।

उसी समय अमेरिका की सरकार को अल्बर्ट आइंस्टीन के द्वारा परमाणु बम की विनाशक शक्ति के बारे में पता चला । उन्होंने एक पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति को लिखा कि ई फर्मी और एल जिलार्ड अनुसंधानों का अध्ययन करने के बाद मैं यह कह सकता हूँ कि अगर निकट भविष्य में वैज्ञानिक युरेनियन से एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बनाने में कामयाबी हासिल कर लेंगे ।  उन्होंने लिखा की इस तरह का केवल एक बम ही किसी भी द्वीप को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए काफी है । बस फिर क्या अमेरिका सरकार को इसकी विध्वंस शक्ति का अंदाजा हो गया और अभी अभी बनी परिस्थितियों ने और इसके लिए एक मौके का काम किया और अमेरिका मैनहटन प्रोजेक्ट शुरू किया । किसी को शक ना हो इसलिये अमेरिका ने इसका नाम डेवलपमेंट ऑफ सब्स्टीट्यूट मैटेरियल रखा । इसके लिए न्यू मैक्सिको में अलामेस स्थापित किता गया और यही पर परमाणु बम का निर्माण शुरू किया ।

परमाणु बम का आविष्कार किसने किया और कब?
रॉबर्ट ओपनहाइमर

इस योजना के निदेशक रॉबर्ट ओपनहाइमर थे और उपनिदेशक एनरिको फर्मी थे ।

पहले परमाणु बम का परीक्षण –

 16 जुलाई 1945 का वह दिन कौन भूल सकता है जब पहली बार दुनिया के सामने इस ब्रह्मण्ड के सबसे शक्तिशाली हथियार का परीक्षण किया गया था । 16 जुलाई को सुबह के 5.30 बजे थे । उस समय अमेरिका के लॉस अलमोस से 200 मील की दूरी पर अलेमो गोर्डो के उत्तरी रेगिस्तान को चुना गया । इसकी एक पहाड़ी पर 32 टन की 100 फ़ीट लोहे की एक इमारत का निर्माण किया गया ।

इसका परीक्षण देखने के लिए इस पहाड़ी से बहुत दूर लगभग 1000 हाजर दर्शक भी मौजूद थे ।

निश्चित समय ने इसका परीक्षण किया गया और एक भयानक विस्फोट के साथ दुनिया मे एक नए युग का प्रारम्भ हो गया ।

यह परीक्षण कितना खतरनाक था इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि इसके निदेशक परमाणु परीक्षण स्थल से 9 मील दूर अपने कक्ष में बैठे थे । तब भी उन्हें वहां तेज गर्मी का अहसास हो रहा था ।

बम के विस्फोट से 40 हजार फीट का एक धुंए का बादल बना , 100 फिट की इमारत का नमो निशान मिट गया । तेज गर्मी के कारण इमारत के नीचे की मिट्टी पिघल कर कांच बन गई । एक मील क्षेत्रफल में स्तिथ हर प्रकार के जीव जंतु मारे गए । इसका प्रभाव पृथ्वी के ऊपरी हिस्से में ही नही हुआ बल्कि इसका असर पृथ्वी के नीचे में पड़ा क्योकि 1 मील के क्षेत्रफल में जमीन के नीचे रहने वाले जीव जंतुओं की भी मौत हो गई थी ।

इसका प्रभाव 30 मील की दूरी तक था । क्योकि 30 मील के एरिया में रहने वाले पशुओं के बाल तक उड़ गए थे । इसकी चमक को 450 मील की दूरी तक देखा जा सकता था ।

परमाणु बम

परमाणु बम का विस्फोट –

परमाणु बम के सफल परीक्षण के ठीक 22 दिन बाद अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम से हमला कर दिया । 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया गया । इस बम का नाम लिटिल बॉय था और इसे एक हवाईजहाज से नीचे गिराया गया था ।

इसके विस्फोट से पूरा हिरोशिमा मौत का अ नगर बन गया । घरों की छत उड़ गई । लोग , पशु पक्षी सब मारे गए । धूल और धुंए का एक बहुत ही विशाल काला बदल आसमान में छा गया । विस्फोट का असर 17 किलोमीटर दूर के मकानों पर भी हुआ ।

इसके 3 दिन के बाद अमेरिका ने एक और परमाणु बम नागाशाकी पर गिराया । 9 अगस्त 1945 के उस दिन गिराए गए परमाणु का नाम फेट मैन था , और हिरोशिमा जैसी तबाही का मंजर पूरी दुनिया ने नागाशाकी में भी देखा । अगर रिपोर्ट की माने तो ये दोनों शहर पूरी तरह से नष्ट हो नए थे । दूरसंचार और बिजली जैसी सुविधाएं नष्ट हो गई । आग बुझाने वाली गाड़िया और कर्मचारी सभी मौत के मुंह मे समा गए ।

90 प्रतिशत से ज्यादा लोग तुरंत ही मौत के मुँह में समा गए । जो जिंदा बचे थे उन्हें बचाने वाला कोई नही था । 200 डॉक्टरों में से मात्र 30 डॉक्टरों  को महीने भर के इलाज के बाद बचाया जा सका । 1730 नर्स में से 1645 की मौत हो गई । 45 अस्पतालों में से सिर्फ 3 अस्पताल बचे थे जिन्हें काम लिया जा सकता था । नही तो दोनों शहर पूरी तरह से बर्बाद हो चुके थे । इस विस्फोट में जो लोग बचे थे उनका जीवन भी किसी नारकीय जीवन से कम नही था । वर्षो तक वहां अपाहिज लोग पैदा होते रहे ।

किन देशों के पास कितने परमाणु हथियार उपलब्ध है –

1. अमेरिका – 6600 परमाणु बम

2. रूस – 6800 परमाणु बम

3. ब्रिटेन – 215 परमाणु बम

4.  फ्रांस – 300 परमाणु बम

5. चीन – 270 परमाणु बम

6. पाकिस्तान – 130 परमाणु बम

7. भारत – 120 परमाणु बम

8. इजराइल – 400 परमाणु बम

9. उत्तरी कोरिया – 15 परमाणु बम

निष्कर्ष –

 दोस्तो हमे परमाणु बम के इस्तेमाल के बारे में बहुत ही गंभीरता से विचार करना होगा क्योकि यह एक ऐसा हथियार है जो पूरे विश्व को खत्म कर सकता है । और इस सम्पूर्ण पृथ्वी से पूरी जैव विविधता को खत्म कर सकता । आज जिस पर प्रकार से देशों के बीच तनाव की स्तिथियाँ उपस्थित होती है उन्हें देखते हुए हम कह सकते है कि जल्द ही आने वाले समय में इनके इस्तेमाल पर गंभीरता से विचार नही किया गया था । बहुत से देश और शहर नागाशाकी और हिरोशिमा बनने वाले है ।

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