Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya -पूरी जानकारी

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya? एवं इससे जुड़ी हुई अन्य दूसरी जानकारी भी बताएँगे तो आप सभी हमारे इस आर्टिकल को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें।

Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya
Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya

घड़ी का आविष्कार कब और किसने किया ?

समय बताने का सबसे अच्छा साधन घड़ी ही है । बहुत समय पहले जब घड़ी का आविष्कार नही हुआ था तब लोगो तारो की चाल को देखकर , सूर्य के देखकर , चाँद को देखकर समय का पता लगाते थे । उस समय के समय मे कोई प्रमाणिकता नही होती थी क्योकि यह सिर्फ एक अंदाजा ही होता था । धीरे धीरे जब घड़ी का विकास हुआ तो लोग समय का सही अनुमान लगाने लगे ।

आज बाजार में बहुत सारी घड़ियां मौजूद है । लगातार होते परिवर्तनों की बदौलत आज बाजार ने स्मार्टवाच जैसी घड़ियां भी मौजूद है , जो समय ही नही बताती । बल्कि इनकी सहायता से आप अपने आपको स्वस्थ रख सकते है । इसकी सहायता से आप किसी को सन्देश भेज सकते है प्राप्त कर सकते है । कॉल कर सकते है ।

आज लगातार बदलते परिवेश में घड़ी मात्र एक समय बताने वाला यंत्र मात्र ही नही रह गया है बल्कि यह आधुनिक फैशन का भी एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है ।

दोस्तो आज हमारे पास हजारों तरीके हो समय देखने लेकिन जब पहली घड़ी का आविष्कार किया गया था तो यह किसी चमत्कार से कम नही था । लोगो के लिए यह एक ऐसा अजूबा था जिसके लिए ये माना जाता था कि ऐसा सम्भव ही नही हो सकता की कोई यंत्र समय का मापन कर सके ।

Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya?

घड़ी का आविष्कार और इसकी विकास यात्रा –

पहले के समय मे सूर्य को देखकर समय का अंदाजा लगाया जाता था । सूर्य की विभिन्न स्तिथियों से समय को तय किया जाता था लेकिन समस्या तो तब उतपन्न होती थी जब  बारिश का मौसम आता हो या फिर आकाश में बादल छाए हुए हो । तब समय का पता लगाने के लिए एक नए तरीके को खोजने का प्रयास किया गया । जिसके परिणामस्वरूप जल घड़ी अस्तित्व में आई । जिसकी खोज का श्रेय चीन को जाता है ।

ये सभी विधियां दिन के समय काम आने वाली विधियां थी जिन्हें सिर्फ सूरज की रोशनी या दिन के प्रकाश में ही काम लिया जा सकता था ।

जब रात हो जाती थी तब समय का पता लगाना बिल्कुल ही नामुमकिन हो जाता था । रात्रि में समय का पता लगाने का पहला प्रयास इंग्लैंड के एल्फ्रेड महान ने किया था । उन्होंने मोमबत्ती के पिघलने की गति से रात्रि के समय को मापने की विधि को ईजाद किया । उन्होंने मोमबत्ती पर समान दूरी पर कुछ चिन्ह बनाये  और मोमबत्ती के पिघले से समय का अंदाजा लगाया  ।

यह एक ऐसी विधि थी जो पूर्ण तरीके से परिष्कृत तो नही थी लेकिन यह दिन और रात , हर मौसम में काम करने वाली विधि थी ।

ऐसा माना जाता है कि आधुनिक घड़ी की नींव पॉप सिलवेस्टर द्वितीय ने रखी थी । ऐसा भी माना जाता है कि सन 996 में पहली घड़ी का निर्माण पॉप ने ही किया था ।

इसके अलावा 1288 में इंग्लैड के वेसमिस्टर के घण्टाघर और फिर 1326 में अलबांस में घड़ियां लगाई गई । 13 वी शताब्दी में यूरोप में घड़ियो का उपयोग होने लग गया था ।

996 में घड़ी का अविष्कार हुआ लेकिन इसमें संदेह है क्योकि इतिहासकारों के अनुसार  घड़ी की मिनट वाली सुई का आविष्कार सन 1577 में स्विटरजरलैंड के एक खगोलशास्त्री जॉस बर्गी ने अपने एक मित्र के कहने पर किया था । जब घड़ी की मिनट सुई का आविष्कार 1577 में हुआ था तो फिर 977 में जो घड़ी बनाई गई थी उसमें समय किस तरह से देखा जाता था इसके बारे में कोई कुछ भी कहने को तैयार नही है ।

लेकिन इतिहास में ऐसा भी वर्णन मिलता है की जोस बर्गी से पहले ही जर्मनी के न्यूरेमबर्ग शहर के  पीटर हेनलेन ने एक ऐसी घड़ी बना ली थी जो आकर में काफी छोटी थी और उसे एक जगह से दूसरी जगह आसानी से लाया ले जाया जा सकता था । बिल्कुल आज की घड़ी की तरह ही । यह बिल्कुल हमारे हाथ मे आज पहने जाने वाली घड़ी के जैसे ही थी ।

ऐसा नही है कि भारत मे समय देखने के कोई प्रयास नही किये गए । बल्कि भारत मे तो समय को बहुत छोटी छोटी इकाइयों में बांटा गया था । भारतीयों ने तो चंद्रमा और सूर्य की गतियों के आधार पर पूर्णतः वैज्ञानिक कलेंडर भी बना लिया था । भारतीयों के पास समय देखने के अनेक साधन मौजूद थे ।

भारतीयों के पास दिन में और रात में समय देखने की बहुत ही अच्छी सुविधा मौजूद थी । भारत की उस प्राचीन घड़ी की सहायता से आज भी समय का एक दम सही मापन किया जा सकता है । इसका सबसे अच्छा उदाहरण है भारत मे पांच जगहों पर बने जंतर मंतर । इनमें लगी घड़ियां आज भी समय का सही मापन करती है । ये घड़ियां दिन में सूर्य के प्रकाश से और रात्रि में चंद्रमा के प्रकाश में काम करती थी ।

इन घड़ियों को आप भी देख सकते है । इन जंतर मंतर की यात्रा करके । ये जंतर मंतर निम्न है –

1 . जयपुर

2 . दिल्ली

3 . मथुरा

4 . वाराणसी

5 . उज्जैन

इन जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के महाराजा जय सिंह द्वितीय ने 18 वी शताब्दी में करवाया था ।

धीरे धीरे घड़ियां अपने क्रमिक विकास के अंर्तगत विकसित होती रही ।

लगातार होते विकास ने इसे और ज्यादा सुलभ बना दिया ।  पहली हाथ घड़ी का आविष्कार ब्लेज पास्कल ने किया था । वे जब काम करते थे तो अपनी घड़ी को रस्सी की सहायता से अपने हाथ के चारो तरफ बांध लेते थे । जिससे काम करते समय भी समय देखने मे काफी आसानी होती थी । धीरे धीरे अनेक प्रकार के बदलाव के बाद हाथ मे पहनने वाली घड़ी लोगो के हाथों में दिखाई देने लगी । आज  तो बाजार में अनेक प्रकार की घड़ियां मौजूद है । इन घड़ियों में से आप अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते है । और घड़ी को समय देखने और फैशन के लिए भी काम ले सकते है ।

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बाजार में उपलब्ध घड़ियों के प्रकार –

जब से घड़ियों का आविष्कार हुआ है तब से आज तक इनमें अनेको बदलाव हुए है । जिसके फलस्वरूप बाजार में अनेक प्रकार की घड़ियां मौजूद है

1. एनलॉग घड़ी

2 . डिजिटल घड़ी

3 . हाइब्रिड घड़ी

4 . आरामदायक घड़ी

5 . स्मार्ट घड़ी

6 . क्वार्ट्ज घड़ी

7  . यांत्रिक स्वचलित घड़ियां

8 . पोशाक घड़ी

1.  एनलॉग घड़ियां –

इस प्रकार की घडियो मे पारंपरिक फेस काम लिया जाता है और इनमें सुइयों का इस्तेमाल किया जाता है । एनालॉग का अर्थ प्रतिशोध होता है । इसलिए इस प्रकार की घड़ियों का आविष्कार निशाना लगाने के लिए किया गया था ।

2 . डिजिटल घड़ी – 

 1920 में पहली मैकेनिकल घड़ी बनाई गई थी । इसके बाद सन 1970 में पहली इलेक्ट्रॉनिक घड़ी बनाई गई । 1970 में बनाई गई इस घड़ी का नाम पल्सर एलईडी प्रोटोटाइप था । जिसे हैमलिंटन वाच कम्पनी और इलेक्ट्रो डेटा द्वारा  मिलकर बनाया गया था ।  जिसे जॉर्ज एच थिएस द्वारा 4 अप्रैल 1972 को स्थापित किया गया था । पहली डिजिटल घड़ी पल्सर में 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया गया था और उस समय इसकी कीमत 2100 डॉलर थी ।

3 . हाइब्रिड घड़ियां –

यह एक सामान्य घड़ी की तरह दिखने वाली घड़ी है । जो यांत्रिक और स्मार्टवॉच दोनों के बीच की कड़ी है । इसका मतलब यह कतई नही है कि इसमे टच स्क्रीन का उपयोग किया जाता है ।

4 . आरामदायक घड़ियां –

यह एक प्रकार की ऐसी घड़ी होती है जिसे पहने के बाद किसी प्रकार की समस्या का सामना नही करना पड़े ।

5. पोशाक घड़ियां –

ये कपड़ो के कलर के अनुसार पहने जाने वाली घड़ियां होती है । जिन्हें सिर्फ फैशन के लिए ही काम लिया जाता है ।

6.  क्वार्ट्ज घड़ियां –

यह घड़ी बैटरी से चलती थी । इस घड़ी में 8192 हर्ट्ज की आवृत्ति का एक थरथराने वाला क्वार्ट्ज लगा होता था ।

7. यांत्रिक स्वचालित घड़ियां –

इस प्रकार की घड़ियों में बैटरी की आवश्यकता नही होती है बल्कि इन्हे चलाने के लिए यांत्रिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है ।

8.  स्मार्ट घड़ियां –

इन घड़ियों को कम्प्यूटर कहे हो कोई अतिशयोक्ति नही होगी क्योकि यह आपके हाथ पर बन्धा एक बहुत छोटा कंप्यूटर है । जो आपकी हार्ट बीट को माप सकता है । आपके ब्लडप्रेशर को माप सकता है । आपने कितनी ऊर्जा काम ली इसकी भी गणना कर सकता है । यह आपके सन्देश भेज सकता है , आपके सन्देश प्राप्त कर सकता है । इसकी सहायता से आप किसी व्यक्ति की कॉल भी कर सकते है । अगर बैठे बैठे कही बोर हो रहे है तो आप इसकी सहायता से गाने भी सुन सकते है आनंदित हो सकते है।

निष्कर्ष –

इस लेख में हमने आपको घड़ी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करवाई है । यह जानकारी आपको कैसी लगी इसके बारे में आप हमें बता सकते है । साथ ही साथ अगर इस लेख से जुड़े  आपके कोई  प्रश्न हो तो भी आप उनकी चर्चा हमसे कर सकते है । उम्मीद है कि आपको ये जानकारी बहुत ही पसन्द आएगी इसलिए इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करें ।

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya? एवं इससे जुड़ी हुई अन्य जानकारी भी आप सभी को बताई गयी है। तो हमको उम्मीद है की Ghadi Ka Avishkar Kisne Kiya? पर ये आर्टिकल आपको जरूर पसंद आएगा।

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