Car Ka Avishkar Kisne Kiya -पूरी जानकारी

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि Car Ka Avishkar Kisne Kiya ? एवं इससे जुड़ी हुई अन्य दूसरी जानकारी भी। तो हमारे इस आर्टिकल को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें।

Car Ka Avishkar Kisne Kiya
Car Ka Avishkar Kisne Kiya

Car Ka Avishkar Kisne Kiya ?

कार का आविष्कार कब और किसने किया था ?

आपको कही जाना होतो आप अपनी कार से जाना पसंद करते है । फिर चाहे कही घूमने जाना हो , किसी की शादी में या पार्टियों में जाना हो हर जगह जाने के लिए सबसे आवश्यक और सबसे सुगम साधन कार ही लगती है ।

क्या बिना कार के अपनी ज़िंदगी की कल्पना कर सकते है या फिर बिना किसी चौपहिया वाहन के आप अपने व्यापार या फिर और अपने जीवन के किसी और काम के बारे में कल्पना कर सकते है ।

उस दुनिया की कल्पना कीजिए जब लोगो के पास आने जाने के लिए कार जैसे कोई साधन मौजूद नही थे । तब के महीनों तक यात्रा के बाद ही व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच पाता था । आज की तरह किसी भी प्रकार के सामान को लाने और ले जाने में कई महीनों के समय लग जाता था । इस कारण बहुत ही कम व्यापार होता था । लोगो की आमदनी भी बहुत ही कम थी । लेकिन कार की खोज के बाद जैसे सब कुछ बदल गया । लोगो के व्यापार बढ़ने लगे । लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर कुछ ही समय मे काफी सुगमता से पहुंचने लगे ।

लेकिम कार की यह यात्रा इतनी सुगम नही थी । दुनिया की पहली कार भी आज की तरह आधुनिक नही थी ।

आज के इस लेख में हम कार की सम्पूर्ण यात्रा के बारे में जानेंगे और महसूस करेंगे कार को बनते हुए और उसे बनाने में लगे संघर्ष को ।

इस लेख के माध्यम से आप पहली कार का निर्माण किसने किया , पहली कार कहाँ चली , पहली कार कितने किलोमीटर तक चली , पहली पेट्रोल कार कब बनी ,  भारत मे पहली बार कार कब चली  , मोटर कार कम्पनी पहली बार कब बनी जैसे प्रश्नो के जवाब आपको जानने को मिलेंगे इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें और हमे अपने अनुभवों से जरूर अवगत करवाये ।

कार क्या है ?

कार एक चौपहिया वाहन है । यह चार पहियों पर चलने वाला द्रुत गति का वाहन है । जिससे लोग एक साथ से दूसरे स्थान की यात्रा करने के लिए काम लेते है । इसके  यात्रा काफी कम समय और सुगमता से पूरी होती की जाती है । यह पेट्रोल या डीजल से चलने वाला वाहन है । जिसमे एक इंजन लगा होता है।  आज की आधुनिक होती कार तो इतनी आधुनिक हो गई है कि यह खुद भी चल सकती है । आज की कार में कृत्रिम बुद्धिमता का प्रयोग किया जाने लगा है । इसमें आपको ए सी जैसी सुविधा भी मिलती है जो आपके सफर को काफी आरामदायक बनाती है ।

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कार का अविष्कार –

माना जाता है कि भारत में ही पहिये का अविष्कार हुआ था। और वो भी लगभग 4000 साल पहले । अगर दुनिया की बात करे तो पहिये का उपयोग 18 वी शताब्दी के अंत मे प्रारम्भ हुआ था । जब दुनिया ने पहली बार पहिये को काम लेना शुरू किया तो यह उसकी सभ्यता के लिए सबसे पहला बड़ा मील का पत्थर था । इसके बाद जब पहली बार दुनिया मे इंजन का आविष्कार हुआ तो यह मानव सभ्यता के लिए एक दूसरा बहुत ही बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला था । यह मानव के जीवन को पूरी तरह से बदलने वाला था।

इंजन की खोज के बाद ऐसे यंत्र बनाये जाने लगे जो छोटे हो और कही आने और जाने के साधन के रूप में काम लिए जा सके । इसके लिए सबसे पहले साइकल को एक मोटरसाइकिल में बदला गया । इसके बाद मानव की आवश्यकता के आधार पर एक ऐसी कल्पना को मूर्त रूप दिए जाने की कोशिश की जाने लगी जिंसमे व्यक्ति का सफर ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो सके  । इसके लिए पूरी दुनिया में हर जगह अलग तरह के प्रयास किये जाने लगे । कहते है कि आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है और इसी मानव की आवश्यकता ने उसे एक कार को आकार देना शुरू कर दिया  ।  अनेको असफलता के बाद दुनिया की सबसे पहली कार 1885 में एक जर्मन इंजीनियर कार्ल बेंज ने बनाई थी । यह कार इंटरनल क्यूबशनल इंजन पर चलती थी ।

दुनिया की पहली कार की तरह चार पहियों की कार नही थी । इस कार में कुल तीन पहिये थे और ये पहिये किसी साइकल के पहियों जैसे दिखते थे । और इन पहियों का आकार भी साइकल के पहियों के आकार के समान ही था । इस कार का नाम मोटरवगन रखा गया ।

अगर इसके इंजन के पावर की बात करे तो यह सिर्फ 954 cc का एक हल्का कम्बशन इंजन था । इस कार की डिजाइन स्वयं कार्ल बेंज ने ही कि थी । यह कार पेट्रोल से चलती थी । इसे कार्ल बेंज से खुद के लिए बनाया था ।

इसके इंजन की शक्ति बढ़ाने और इसे और ज्यादा आरामदायक बनाने के लिए कार्ल बेंज ने अनेक कल पुर्जो का अविष्कार भी किया था । जैसे की थ्रोटल सिस्टम , स्पार्क प्लग , वाटर रेडियेटर , कैबुरेटर , और गियर सिफ्टर्स आदि ।

दुनिया की पहली कार का निर्माण 1885 में ही कर लिया गया था लेकिन इसका सार्वजनिक प्रदर्शन पहली बार 3 जुलाई 1886 को जर्मनी के मानहाईम शहर में किया गया था क्योकि इस कार को पेटेंट 1886 में प्राप्त  हुआ था इसलिए इसी साल इसका प्रदर्शन कर पाए ।

इस कार के निर्माण के पीछे भी एक कहानी है कि कार्ल बेंज ने सबसे पहले लोहे की ढलाई का कारखाना प्रारम्भ किया था लेकिन इस कारखाने में इन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा लेकिन इनकी पत्नी ने सहायता की और इन्हें मोटरवेगन को बनाने के लिए प्रेरित किया ।

इसके बाद बेंज ने इसके दो मॉडल और बनाये थे। वे मॉडल थे मोटरवेगन – 2 और मोटरवेगन – 3 , जिनमे क्रमशः 2 हॉर्सपावर और 3 हॉर्सपावर के इंजन लगे हुए थे । मॉडल – 3 की रफ्तार अधिकतम 16 किलोमीटर पर घंटा थी ।

इस कार को सबसे पहले लम्बी दूरी तक 5 अगस्त 1888 में बेंज की पत्नी मार्था ने ही चलाया था 105 किलोमीटर तक । उनके साथ उनके दो बच्चो ने भी इसमें यात्रा की थी ।

चार पहियों की आधुनिक कार स्वरूप 1894 में बनाया गया था और इसका नाम बेंज वेल्वो रखा गया था जिसकी अधिकतम रफ्तार 20 किलोमीटर प्रति घंटा थी और इसके 3 हॉर्सपावर के इंजन का इस्तेमाल किया गया था ।

बेंज वेल्वो पहली व्यवसायिक उत्पादन करने वाली कार कम्पनी थी । जिसकी स्थापना सन 1894 में की गई थी । इस कम्पनी ने 1902 तक लगभग 1200 कार बेची थी ।

बेंज को कार बनाने का विचार कहा से मिला और बेंज से पहली बनी अनेक कारे  –

बेंज को कार बनाने का  विचार महान कलाकार और अविष्कारक लियो नार्दो दा विंची के उस विचार से मिला था जिंसमे उन्होंने एक बिना घोड़े के चलाई जाने वाली एक यांत्रिक यंत्र का डिजाइन बनाया था । हालांकि अन्य अविष्कारों की तरह यह विचार भी उनके जीवन काल मे सच नही हो सका ।

जिस प्रकार नाव में पाल लगाकर चीन में नावों को चलाया जाता था वैसे ही चीन में पाल लगाकर चार पहिये की गाड़ी को भी चलाया जाता था ।

ऐसी ही पाल की गाड़ी में 16 वी सदी में हॉलैंड में 28 लोगो ने 2 घण्टे में 64 किलोमीटर की यात्रा पूरी की थी ।

सन 1769 में भी एक कार बनाई गई थी जिंसमे स्टीम इंजन का प्रयोग किया गया था लेकिन यह कार 1 घण्टे में सिर्फ 3 किलोमीटर का सफर ही तय करती थी ।

भारत मे पहली बार कार कब चली –

1897 में  पहली बार भारत मे कार चलाई गई । भारत की पहली कार कोलकाता के मिस्टर फोस्टर के मालिक क्रॉप्टन ग्रीवर ने खरीदी थी । सन 1894 में भारत के मुम्बई में 1898 में 4 कार खरीदी गई थी ।

आपकी जानकारी के लिए बता दे इन चार कार में से एक कार टाटा कम्पनी के संस्थापक जमशेद जी टाटा ने खरीदी थी ।

मोटरकार उद्योग की नींव –

सबसे पहले जर्मनी में मोटर कार उद्योग की नींव रखी गई । इसकी नींव रखी थी कार्ल बेंज और गोटबिल डम्बलर ने ।

सन 1885 में ऐसे इंजन को विकसित किया गया जो पेट्रोल से चल सकते हो ।

सन 1900 में फ्रांस के दो नागरिकों ने फ्रांस में कार उद्योग की स्थापना की । लेवसर और पैडहार्ड ने इस उद्योग की नींव रखी थी ।

पहली पेट्रोल कार का निर्माण –

एक अमेरिकी नागरिक चार्ल्स दुरैया ने 1893 में पेट्रोल से चलने वाली कार का निर्माण किया ।  1898 आते आते अमेरिका में मोटर निर्माता कम्पनियों की संख्या 50 तक पहुंच गई थी ।

1904 में कार निर्माण में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई और कार निर्माता कम्पनियों की संख्या 240 तक पहुंच गई ।

 दोस्तो जो कभी कुछ ही लोगो के पास नजर आती थी आज उनकी संख्या बहुत ज्यादा हो गयी है । आज स्तिथि ये है कि सड़क पर चलते समय हमें इंसानों से ज्यादा कार नजर आती है । आज की कार तो काफी उन्नत तकनीकों के साथ आती है । आज जिस रूप में  हम कार को देखते है और विज्ञान जिस प्रकार उन्नत हो रहा है उसे देखते हुए अभी कार अनेक स्वरूपों में आपको नजर आने वाली है ।

निष्कर्ष :-

कार के आविष्कार ने मनुष्य के जीवन को काफी ज्यादा बदल कर रख दिया और आज कार्य की सहायता से ही लोग अपने जीवन में कहीं पर भी जाने के लिए बिल्कुल सामर्थ हैं।आज के समय में कार मनुष्य के जीवन के एक अधिकारी बन चुकी है और किसी के वजह से यात्रा में भी काफी ज्यादा विकास हुआ है।

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि Car Ka Avishkar Kisne Kiya ? एवं इससे जुड़ी हुई अन्य जानकारी भी तो हमको उम्मीद है की Car Ka Avishkar Kisne Kiya ? पर ये आर्टिकल आपको जरूर पसंद आएगा।

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