Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya -पूरी जानकारी

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya ? एवं इससे जुड़ी हुई अन्य दूसरी जानकारी भी बताएँगे तो आप सभी हमारे इस आर्टिकल को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें।

Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya
Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya

बिजली का आविष्कार कब और किसने किया ?

बिजली एक ऐसा शब्द है जिसे अगर मानव के जीवन से बाहर निकाल दिया जाए तो मानव सभ्यता वापस आदिम युग मे पहुंच जाएगी ।

आज के मानव ने जिस आधुनिकता का सफर तय किया है वह बिना बिजली के कतई सम्भव नही था । कल्पना करने से भी डर लगता है की अगर आज बिजली खत्म हो जाये इस दुनिया से तो ये दुनिया कैसी होगी ? सच पूछो तो जैसे व्यक्ति की मूलभूत आवश्यता रोटी , कपड़ा , मकान होती है । वैसे ही राष्ट्र की उन्नति का पर्याय बिजली होती है ।

आज बिजली मानव की दैनिक आवश्यकता की पूर्ति के साथ साथ किसी राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए भी आवश्यक है ।

Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya ?

बिजली की खोज –

ऐसा माना जाता है कु बिजली की खोज 600 ईशा पूर्व हुई थी ।  लेकिन  आज बिजली जिस स्वरूप में हमारे सामने है ये एक बहुत लंबे क्रमिक विकास के बाद है ।

ऐसा माना जाता है कि यूनान के महान दार्शनिक और भौतिक वैज्ञानिक थेल्स ने सबसे पहले ये पता लगाया था की अंबर जो चीड़ के पेड़ का एक प्रकार का गोंद है जिसे कपड़ो पर रगड़ने से उस कपड़े में इस प्रकार की ताकत आ जाती है । जिसके कारण वह सूखे पत्तों , पंख आदि को अपनी तरफ आकर्षित करने लगता है ।

थेल्स ने इस प्रभाव को इलेक्ट्रिसिटी नाम दिया क्योकि यूनानी भाषा मे अम्बर को इलेक्ट्रान कहा जाता है । कालांतर में यही बिजली के लिए एक पर्याय बन गया । इस प्रकार अम्बर को कपड़े पर घिसने से जो प्रभाव पैदा हुआ था उसे घर्षण विधुत कहा गया और इसे इलेक्ट्रान के सिद्धांत के आधार पर भली भांति समझाया जा सकता है ।

हम जानते है कि परमाणु इलेक्ट्रान और प्रोटोन से मिलकर बना है ।  इलेक्ट्रान नाभिक के चारों और चक्कर लगाते रहते जो कि ऋणावेशित होते है तथा प्रोटोन धनावेशित होते है । लेकिन एक परमाणु में इलेक्ट्रान और प्रोटोन की संख्या बराबर होने के कारण यह प्रभाव नष्ट हो जाता है । जिसके परिणाम स्वरूप परमाणु उदासीन हो जाता है लेकिन जब किसी वस्तु को रगड़ा जाता है तो उस वस्तु से कुछ इलेक्ट्रान निकल कर दूसरी वस्तु में चले जाते है । जिसके कारण एक पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है तथा दूसरे में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता हों जाती है । जिस पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है वह धनावेशित हो जाता है । और जिंसमे इलेक्ट्रॉनों की अधिकता होती है वह पदार्थ ऋणावेशित हो जाता है और इस प्रकार विपरीत ध्रुवों में आकर्षण उत्पन्न हो जाता है और वस्तु दूरी वस्तु को आकर्षित करने लगती है ।

थेल्स की खोज के एक लंबे अंतराल के बाद विलियम गेलवार्ट ने पता लगाया कि अम्बर जैसा गुण सिर्फ अम्बर में ही नही पाया जाता है । यह तो अनेक पदार्थो में पाया जाता है । अनेक शताब्दियों के बाद भी वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र में कोई खासी उन्नति नही की थी । लेकिन इटालियन वैज्ञानिक ऐले सालद्रो वोल्टा ने एक खास प्रकार का उपकरण बनाकर हल्की मात्रा में बिजली उतपन्न करने में सफलता प्राप्त कर ली थी ।

सन 1752 में अमेरिका के एक वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रेंकलिन ने एक खतरनाक प्रयोग किया । उन्होंने वर्षा वाले दिन आकाश में पतंग उड़ाई और उसके अंतिम सिरे पर एक धातु की चाबी बांध दी । जब उन्होंने पतंग के आकाश में जाने के बाद चाबी को छुआ तो उन्हें उसमे झटका लगा । इस प्रयोग के माध्यम से उन्होंने सिद्ध किया कि आकाश में होने वाली प्रकाश की चमक भी बिजली का ही एक रूप है।

सन 1865 में फ्रांस के एक वैज्ञानिक लेकलांशे ने एक गीली बैटरी बनाने में सफलता प्राप्त कर ली । उन्होंने अमोनियम क्लोराइड के घोल में जस्ते और कार्बन की छड़ डुबोकर उन्हें एक तार से जोड़कर बिजली की धारा प्राप्त की थी।

सन 1831 में माइकल फैराडे ने चुम्बक की सहायता से बिजली प्राप्त करने का एक मॉडल तैयार किया । उनका मानना था कि जब बिजली चुम्बक पैदा कर सकती है तो चुंबक भी बिजली पैदा कर सकता है । इस प्रकार उन्होंने आधुनिक युग के स्वर्णिम विकास का द्वारा खोल दिया ।

फैराडे के इस अविष्कार ने तो जैसे बिजली के क्षेत्र में क्रांति ही ला दी । उनके इस प्रयोग पर अनेक वैज्ञानिकों ने अनेक सालो तक अथक मेहनत की और अनेक प्रकार के विधुतीय उपकरण बनाने में सफलता हासिल की । थॉमस अल्वा एडिसन ने बल्ब का अविष्कार करके पूरी दुनिया को अंधेरे से निकाल कर प्रकाश के युग का सूत्रपात किया ।

1820 में विधुत मोटर का आविष्कार विलियम स्टर्जन ने किया साथ ही साथ इन्होंने ही पहले विधुत चुम्बक का निर्माण भी किया ।

1867 में जर्मनी के वैज्ञानिक सिमांस ने पहला सफल जनरेटर बनाने में सफलता हासिल कर ली ।

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बिजली की विकास यात्रा और स्त्रोत –

आज बिजली की सहायता से आप फोन पर बात कर सकते है ।  लम्बी दूरी की यात्रा कर सकते है । वायुयान अंतरिक्ष यानों का सफल संचालन कर सकते है । बिजली की सहायता से तार के माध्यम के द्वारा आवाज को एक स्थान से दुसरे स्थान तक बेल और वाटसन ने सफलता प्राप्त कर ही ली थी ।

जब विधुतधारा को उतपन्न किया जाता है तब उसकी प्रबलता बहुत ज्यादा होती है । जिसके कारण इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेज पाना सरल नही होता है इसलिए बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में ट्रांसफार्मर की बहुत ही बड़ी भूमिका होती है ।

यह विद्युत उत्पादन संयंत्र से प्रबल बिजली की धारा को कम करने का कार्य करता है और एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुगमता से भेज सकता है । उसके बाद इसकी प्रबलता को बढ़ाकर वापस इसे घरों , फेक्ट्रियो तक पहुंचा दिया जाता है ।

पहली बार 1898 में अमेरिका में पानी की सहायता से बिजली उतपन्न करने में सफलता प्राप्त की गई । इसके बाद तो अनेक स्रोतों जैसे हवा , सौर ऊर्जा , परमाणु ऊर्जा , जैव ऊर्जा आदि से विद्युत का उत्पादन करने में सफलता प्राप्त कर ली गई ।

अभी तक अधिकतर बिजली का उत्पादन ताप विद्युत संयंत्रों के माध्यम से ही किया जाता है । इसे कोल बिजली भी कहा जाता है । इस प्रकार से बिजली के उत्पादन में कोयले का प्रयोग किया जाता है लेकिन प्रकृति में कोयले की सीमित मात्रा होने के कारण वैज्ञानिकों को इसके विकल्प के बारे में भी सोचना होगा ।

इसके विकल्प के रूप में वैज्ञानिकों ने पानी से बिजली बनाने में सफलता प्राप्त की । इस प्रकार से बिजली बनाने के लिए बड़े बड़े टर्बाइनों को पानी की तेज धार से बहुत तेज घुमाया जाता है जिसके कारण विद्युत धारा उतपन्न होती है । इस स्रोत का नवीनीकरण भी किया जा सकता है ।

इससे प्राप्त बिजली काफी सस्ती होती है । ताप संयंत्र के विकल्प के रूप में परमाणु ऊर्जा से भी बिजली बनाई जाती है । बशर्ते इसमें विकिरणों का बहुत ज्यादा खतरा होने के बाद भी इससे बिजली बनाई जाती है क्योकि इसमें कम मात्रा के ईंधन से बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है ।

परमाणु ऊर्जा से बिजली का उत्पादन निम्न दो तरीको से किया जाता है –

1. नाभिकिय विखंडन

2. नाभिकिय संलयन

1. नाभिकिय विखंडन – जब किसी भारी नाभिक पर न्यूट्रॉनों की बौछार की जाती है तो वह दो हल्के नाभिकों में विखंडित हो जाता है । जिसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में ऊर्जा उतपन्न होती है । इस ऊर्जा को परमाणु रिएक्टर और परमाणु बम बनाने में भी काम लिया जाता है ।

2. नाभिकिय संलयन – जब हाइड्रोजन के दो हल्के नाभिकों को आपस मे संलयन करके हीलियम का एक भारी नाभिक बनाया जाता है । जिससे अत्यधिक ऊर्जा उतपन्न होती है । सूर्य से उतपन्न होने वाली ऊर्जा और हाइड्रोजन बम भी इसी सिद्धान्त पंर कार्य करते है ।

अभी वर्तमान में नाभिकिय संलयन के द्वारा नियन्त्रित ढंग से अभी ऊर्जा प्राप्त करना सम्भव नही है इसलिए अभी नाभिकिय विखंडन के द्वारा ही बिजली प्राप्त की जाती है ।

सूरज की विकिरणों के माध्यम से भी बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है ।  ऐसा अनुमान है कि सौर विकिरण के सिर्फ 0.1 प्रतिशत के माध्यम से सम्पूर्ण पृथ्वी की ऊर्जा जरुरतो को पूरा किया जा सकता है ।

सौर विकिरणों के माध्यम को सौर सेल में परिवर्तित किया जाता है और फिर इस ऊर्जा को काम लिया जाता है।

सौर सेल की ऊपरी सतह प्रकाश प प्रति संवेदी होती है । जिसे बनाने में सिलिकॉन , कैडमियम सल्फाइड , या कॉपर सल्फाइड जैसे पदार्थो का उपयोग किया जाता है ।

भविष्य की ऊर्जा जरुरतो को पूरा करने में पवन ऊर्जा भी एक बहुत बड़ी महत्ती भूमिका निभा सकती है ।  इसमें बड़े बड़े टर्बाइनों को हवा की सहायता से घुमाया जाता है । जिसके कारण विद्युत ऊर्जा उतपन्न की  जाती है ।

निष्कर्ष – 

दोस्तो हमने इस लेख में विद्युत ऊर्जा से जुड़ी हर जानकारी आपको उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है । फिर भी आपके मन मे कोई प्रश्न हो तो वे आप हमसे जरूर साझा कर सकते है । हम आपके हर प्रश्न का जवाब देने का पूरा प्रयास करेंगे । अगर आपको यह लेख पसन्द आया हो तो इसे अपने दोस्तो रिश्तेदारों के साथ भी जरूर साझा करें ।इस लेख से संबंधित आपके कोई सवाल या सुझाव है, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya ? एवं इससे जुड़ी हुई अन्य जानकारी भी आप सभी को बताई गयी है। तो हमको उम्मीद है की Bijli Ka Avishkar Kisne Kiya ? पर ये आर्टिकल आपको जरूर पसंद आएगा।

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