Aeroplane का आविष्कार किसने किया और कब ?

Aeroplane का आविष्कार किसने किया और कब ?

आसमान में तेज आवाज के साथ उड़ते हुए एयरप्लेन ने हमारी मानव सभ्यता को बदलकर रख दिया है । आज प्लेन की सहायता से हम दूर विदेश में बैठे परिजनों से कुछ ही घण्टो की यात्रा करके उनसे मिल पाते है ।

इस आविष्कार ने दुनिया की दूरी को घटा कर कुछ ही मिनट और घण्टो में तब्दील कर दिया है ।

आज हम प्लेन की सहायता से सिर्फ यात्रा ही नही करते बल्कि आज तो प्लेन की सहायता से एक देश से दूसरे देश मे समानो को भी पहुंचाया जाता है । इसके कारण कुछ ही समय मे एक देश के उपभोक्ताओं की जरूरत का सामान दूसरे देश मे बहुत ही आसानी से पहुंचा दिया जाता है  ।

आज के इस आर्टिकल में हम प्लेन के विकास की यात्रा में शामिल होंगे और जानेंगे इसकी विकास यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के बारे ।

एयरप्लेन की कल्पना –

मानव स्वभाव शुरू से ही जिज्ञासु रहा है । जब मानव बंदरो के रूप में था तब से आज तक की इसकी विकास यात्रा में बंदर से आधुनिक मानव तक का पड़ाव सिर्फ उसकी जिज्ञासा के कारण ही पूर्ण हुआ है ।

शायद इसी जिज्ञासा और कौतूहल ने मानव को मुक्त रूप से आकाश में विचरण करते पक्षियों को दखकर उड़ने की कल्पना ने जन्म दिया होगा और कालांतर में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इस जिज्ञासा के संचरण के फलस्वरूप आज मानव हवा में सिर्फ उड़ ही नही सकता बल्कि हजारों तक का सामना एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा सकता है ।

एयरप्लेन को संस्कृत भाषा मे विमान भी कहते है । अगर प्राचीन दस्तावेजो रामायण जैसे ग्रन्थो पर विश्वास किया जाए तो सर्वप्रथम विमान का आविष्कार भारत मे हुआ था । क्योकि रामायण में पुष्कर विमान का वर्णन मिलता है । जिसके सहायता से रावण ने माता सीता का हरण किया था और प्रभु श्रीराम ने , रावण जैसे आततायी का वध करने पश्चात इसी पुष्पक विमान से श्रीलंका से अयोध्या तक कि यात्रा को पूर्ण किया था ।

इसके अलावा महर्षि भारद्वाज मुनि द्वारा लिखे ” वैमानिक शास्त्र ” में अनेक प्रकार के विमानों उनके संचालन की विधियों का वर्णन मिलता है ।

वस्तुत यह ग्रन्थ आज अपने पूर्ण स्वरूप में उपलब्ध नही है लेकिन जितना भी यह उपलब्ध है उसी के आधार पर यह माना जा सकता है कि विमान का आविष्कार भारत मे हुआ था।

लेकिन दोस्तो अगर आधुनिक युग मे विमान के आविष्कार का श्रेय राइट बंधुओ को जाता है ।  जिन्होंने 17 दिसंबर 1903 को अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना के किटिहाक में पहली बार ग्लाइडर को हवा में उड़ाने में कामयाबी हासिल की थी । यह उड़ान सिर्फ 12 सेकेंड की ही थी लेकिन इस उड़ान ने मानव के सदियों पुराने सपने को पूरा करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम बढ़ाया ।

इस उड़ान में ग्लाइडर सबसे पहले 10 फ़ीट ऊपर गया और नीचे आया फिर ऊपर उठा और अंत मे यह 120 फ़ीट दूर जाकर गिरा लेकिन दोस्तो भले ही यह एक ग्लाइडर की उड़ान थी लेकिन यह पहली हवाई उड़ान थी ।

Aeroplane का आविष्कार किसने किया और कब
Aeroplane का आविष्कार किसने किया और कब

Aeroplane का आविष्कार किसने किया और कब ?

राइट ब्रदर्स को विमान बनाने का विचार कहा से मिला –

दोनों राइट ब्रदर्स का नाम विल्बर और ओवरविल था । इनके पिता मिल्टन एक पादरी थी ।

वे पूरे इंडियाना में घूम घूमकर उपदेश देने का काम करते थे । विल्बर का जन्म 1867 में और ओवरविल का जन्म 1871 में हुआ था ।

एक दिन इनके पिता जब विल्बर की उम्र 11 साल ओर ओलिवर की उम्र मात्र 7 साल की थी ,  इनके खेलने के लिए एक ऐसा खिलाना लेकर आये जो उड़ सकता था । इसकी उड़ान कमरे की छत तक थी ।

इस खिलोने का निर्माण एक फ़्रांसिसी ने कागज , बांस और रबर की सहायता से किया था । इसमे लगी रबर की बेल्ट इसके पंखे को चलाने का काम करती थी । यह आज के हेलीकॉप्टर की तरह ही सीधे ऊपर की तरफ उड़ान भरता था ।

भले ही यह एक छोटा सा खेलने का एक खिलौना मात्र था लेकिंन इसने दोनों भाइयों की कल्पना को पंख लगा दिए और ये एक ऐसा ही खिलौना बनाने की कोशिश में जुट गए जो कमरे की ऊंचाई नही बल्कि बदलो की ऊंसचाई तक जा सके ।

ऐसा ही एक खिलौना उन्होंने बनाया भी और उसे चमगादड़ नाम दिया । हालांकि यह खिलौना इतना सफल नही हुआ क्योकि वे इसे जितना ज्यादा बड़ा बनाते यह उतना ही कम ऊंचाई पर जाता था ।

इस खिलोने का निर्मांण बड़े भाई ओरविल राइट ने ही किया था क्योकि उस समय विल्बर बहुत छोटा था ।

कुछ समय के बाद इनका परिवार रिचमंड में शिफ्ट हो गया जहां पर दोनों भाइयों को एक नया शौक लगा पतंग बनाने का और उनकी पतंगे उड़न मशीनों के नाम से प्रसिद्ध हो गई । कहते है कि पूत के पग पालने में ही दिखते है कि वह भविष्य में क्या करने वाला है । कुछ ऐसा ही दोनों भाइयों के साथ था । दोनों भाइयों को हवा में उड़ाना अच्छा लगता था इसलिए वे अलग अलग प्रकार की उड़ने वाली चीजें बनाते थे ।

ओरविलर बहुमुखी प्रतिभा का धनी था । वह हर रोज नई नई चीजें सीखने का शौक रखता था इसलिए जब ओरविलर 12 साल का हुआ तो उसे लकड़ी पंर खुदाई करने का एक नया शौक लगा । इसके बाद उसने एक पुराना छापाखाना खरीदा और उससे एक अखबार छापना शुरू कर दिया ।

1879 में ओरविलर की माँ के मृत्यु के बाद इन्हें काफी धक्का लगा और इन्हें अपना अखबार बन्द करना पड़ा । इसके बाद इन्होंने साइकिल बनाने और बेचने का काम शुरू किया । उस समय भी इनकी रुचि उड़ने वाली चीजें बनाने की और ही थी ईसलिये उस समय जितने भी उड़ने के प्रयोग किये जा रहे थे । उन सभी प्रयोगों की जानकारी दोनों भाइयों को थी और साथ ही साथ वे प्रयोग असफल क्यो हुए इसकी भी उन्हें बहुत ही अच्छे से जानकारी थी । उस समय जर्मनी के ऑटो और लिलियथल पक्षियों की तरह उड़ने के प्रयोग कर रहे थे और इसी प्रयोग के समय एक दिन 1896 में लिलियथल की मौत हो गई । जिससे दोनों भाइयों को दुख भी हुआ और साथ ही साथ मन मे उनके बलिदान को सार्थक करने की कसक पैदा हो गई ।

राइट बंधुओ ने असम्भव को सम्भव किया –

1896 में दोनों भाइयों ने लिलियथल के ग्लाइडर ने प्रेरणा लेकर ग्लाइडर बनाना शुरू किया । इनके द्वारा बनाये गए पहले ग्लाइडर का नमूना पतंग के समान था । जिसे रस्सी से बांधकर नियंत्रित किया जाता था । इसमें एक भाई रस्सी को नीचे जमीन पर पकड़े रहता और दूसरा भाई उसे हवा में नियंत्रित करने का प्रयास करता कुछ दिनों के बाद राइट ब्रदर्स को समझ आ गया कि ग्लाइडर को शरीर के आगे पीछे दाए बाए करने से नियंत्रित करना सम्भव नही है ।

उन्होंने इसे नियन्त्रित करने के लिए इसके डिजाइन में सुधार किया और इसमे पतवार लगाए जिससे इसे इच्छानुसार हवा में ऊपर या नीचे लाया जा सके ।

राइट ब्रदर्स ने इसमें एक सीधा खड़ा पतवार भी लगाया जिससे ग्लाइडर को दाए बाए भी घुमाया जा सके । नियमित अभ्यास के बाद राइट ब्रदर्स ने ग्लाइडर को नियंत्रित करना सीख लिया । सर्वप्रथम नियंत्रित ग्लाइडर बनाने का श्रेय राइट ब्रदर्स को ही जाता है ।

लगातार 7 साल की मेहनत और अपने पास की हर एक  पाई पाई को इन्होंने अपने सपने की उड़न मशीन बनाने में लगाकर कामयाबी पाई ।

कड़ी मेहनत और लगन के बाद तैयार हुए इस ग्लाइडर में राइट ब्रदर्स ने खुद के द्वारा बनाया गया 25 अश्व शक्ति का एक इंजन भी लगाया और इस इंजन के पास ही पायलेट के लिए एक सीट भी लगाई थी ।

इस मॉडल के तैयार होने के बाद कितिहोक के मैदान में 14 दिसम्बर 1903 को ग्लाइडर की पहली उड़ान का प्रदर्शन किया गया । जिसे देखने के लिए हजारों लोग वहां उपस्थित थे ।

राइट ब्रदर्स ने सोचा कि ग्लाइडर को हवा में उड़ाने से पहले इसे थोड़ी देर जमीन पर दौड़ाया जाए । विल्बर राइट ने इंजन चालू किया और और इसे रेल की पटरी पर दौड़ाया लेकिन यह यान थोड़ा सा हवा में ऊपर उठा लेकिन तुरन्त ही नीचे आ गया और ग्लाइडर के कुछ पुर्जे  टूट गए ।

लोगो ने इनकी खिल्ली उड़ाई लेकिन अपनी असफलता से हतास ना होकर इन्होंने तीन दिन बाद फिर वापस ग्लाइडर की उड़ान देखने के लिए लोगो को आमंत्रित किया ।

तीन दिन तक इन्होंने उस ग्लाइडर के पुर्जो को ठीक किया और इसे 17 दिसम्बर के लिए तैयार किया ।

वो पहली ऐतिहासिक उड़ान –

17 दिसम्बर को राइट ब्रदर्स ने ग्लाइडर को उड़ाने के लिए एक अलग ही व्यवस्था की । विमान उड़ान से पूर्व दौड़ सके इसके लिए इन्होंने एक गाड़ी से ग्लाइडर को बांधा और एक लंबी पटरी की भी व्यवस्था की गई । तार के एक सिरे से भारी वजन लटकाया गया । सारी तैयारी होने के बाद उस वजन को छोड़ा गया और खिंचाव से गाड़ी पटरी पर दौड़ने लगी । गाड़ी के दौड़ने से ग्लाइडर कुछ ऊपर गया फिर वापस नीचे आया और फिर ऊपर उठा और 120 फिट की दूरी पर जाकर उतरा ।

यह उड़ान मात्र 12 सैकेंड की थी लेकिन यही वो तारीख थी जो मानव सभ्यता के स्वर्णिम विश्व इतिहास की तारीख बन गई ।

निष्कर्ष –

हमारे द्वारा उपलब्ध करवाई गई विमान की विकास यात्रा आपको किसी लगी ? इसके बारे में अपनी राय जरूर दे । आपकी टिप्पणियां और सुझाव हमारे लिए उत्साह बढ़ाने वाले बूस्टर होते है । अतः अपने कीमती अनुभवों से जरूर अवगत करवाए ।

अगर आपको Aeroplane का आविष्कार किसने किया और कब ? यह जानकारी अच्छी लगी तो आप इसे शेयर अवश्य करे ।

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